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अच्छे का अस्तित्व बुरे की उपस्थिति से है -Existence of Good due to presence of Bad

अच्छे का अस्तित्व बुरे की उपस्थिति से है -Existence of Good due to presence of Bad

जीवन मृत्यु.. life & death
अच्छा बुरा.. good & bad
स्वार्थ निस्वार्थ.. Selfish & Selfless
सफेद काला.. Black & White
सफल असफल.. Success & Failure
प्रेम नफरत.. Love & Hatred

उपरोक्त युग्मों से उनका अर्थ ज़ाहिर हो रहा है..
अब थोड़े और गहरे उतरें तो पाएंगे कि एक कि उपस्थिति ही दूसरे को अस्तित्व प्रदान करती है.. जैसे अच्छे का अस्तित्व तब ही है जब बुरा विद्यमान है..
तो बुराई को समाप्त करने से हमारा तात्पर्य क्या होता है..?

जबकि अच्छा क्या है इसकी समझ हमें बुरे को जानकर एवं देखकर ही तो मिली है..
अतः विचारणीय यह है कि इन दोनों के परे जो अवस्था थी या है वो क्या है..?
या कैसी रही होगी.. ?

समस्त संसार को इन शब्दों एवं उनके अर्थों से किसने अवगत कराया..?
इन शब्दों का इजाद कब हुआ एवं किसने किया होगा..?

जबसे हम समझदार हुए हैं हमने यही देखा एवं सुना है.. यहां तक कि हमने पुराणों में भी यही पढ़ा है कि हमें अच्छा एवं सच्चा ही होना चाहिए.. और बुराई एवं झूठ को समाप्त करना चाहिए..

इसका अर्थ है कि ये दोनों सृष्टि के प्रारंभ से ही विद्यमान है.. क्या इनमें से प्रत्येक का अस्तित्व तब ही अधिक है जब ये दोनों रहें..
यदि सिर्फ अच्छा ही रहे तो कुछ सदियों के बाद वो अच्छा कैसे माना जाएगा..क्योंकि अच्छा शब्द तो बुरे की वजह से है और यदि वजह ही नहीं रहे तो फिर वो अच्छा ना होके क्या माना जाएगा..?

उसका अस्तित्व क्या होगा..?
सिर्फ अच्छा ही अच्छा रह गया.. तो फिर उसको क्या कहेंगे जो रह गया..?अच्छा या कुछ और..? क्योंकि अच्छा तो सिर्फ शब्द है.. बुरे का विलोम..

हो सकता है मैं अपनी मनोदशा.. जिज्ञासा अथवा अपना विचार ठीक से नहीं समझा पाया हूं..पर आप सभी मुझसे अधिक समझदार हैं.. अगर आप तक कुछ पहुंचे तो मुझे ज़रूर अवगत करवाएं..

जय हो🙏😊💐

संजयपुरोहित